#कैसा शोर है....#
#कैसा शोर है....#
सुनाई देता कैसा शोर है,
वीभत्स है , कठोर है।
काल करता प्रचंड तांडव,
अंतिम बेला में ना बंधु , ना बांधव।
छाया उषा में तमस घनघोर है,
सुनाई देता कैसा शोर है।
मौन करता चीत्कार,
मानवता करे हाहाकार,
सांसों का होता व्यापार।
ये कैसा दौर है?
सुनाई देता कैसा शोर है,
वीभत्स है, कठोर है।
जीवन पर प्रहार है,
क्या ये प्रकृति का प्रतिकार है?
मन ना माने हार है।
विपदा पार करना साथ है।
हौसले की नाव चढ़ चलना साथ है।
माना कठिन बहुत दौर है,
हिम्मत की नाज़ुक डोर है,
तूफान का सा शोर है,
मगर उस पार सुनहरी भोर है।
स्वरचित
डॉ० मिली टंडन
16.4.21
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