हैं न.....

हैं न.....

हक़ीक़त से परे ख़्वाबों में ज़िंदगी कितनी हसीन लगती हैं, न |

पेड की छांव में बैठकर धूप कितनी अच्छी लगती हैं, न |

भरे पेट भाषण देना कितना सरल होता हैं ,न |

 तस्वीरों की तरह काश सच में मुस्कुराती तो लड़कियां कितनी अच्छी लगती, हैं न |

जंगल में लगी आग
दूर से देखने पर शायद रोशनी लगती हैं, न |

हों अगर घर में ही दुश्मन तो फिर
हर एक दुआ बददुआ लगती हैं, न | 

आंख से जब आंसू छलकने लग जाएं तो
हंसी कितनी अच्छी लगती हैं, न
 
बिछुड़  जाय  कोई  अपना  तो उसके साथ जी हुई जिंदगी कितनी कीमती लगती हैं, न  |

होता गर जिंदगी के उस पार  बिछुड़े हुओं से मिल पाना सम्भव तो जिंदगी कितनी लंबी लगती हैं, न |

डॉ.  मिली टंडन 
10.06.2022

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